सुंदरकांड पाठ

सुंदरकांड पाठ — भिलाई, दुर्ग, रायपुर एवं पूरे छत्तीसगढ़ में

संगीतमय सामूहिक सुंदरकांड पाठ, आरती एवं प्रसाद सहित। घर, दुकान, कार्यालय एवं सामूहिक आयोजनों के लिए।

सुंदरकांड श्री रामचरितमानस का वह अध्याय है जिसमें श्री हनुमान जी की भक्ति, बल एवं बुद्धि का वर्णन है। मान्यता है कि सुंदरकांड के पाठ से मन को धैर्य, साहस और सकारात्मकता मिलती है तथा घर-परिवार में भक्ति का वातावरण बनता है।

मारुति मानस मंडल भिलाई की अनुभवी मंडली सुंदरकांड पाठ को पूरी परंपरा, शुद्ध उच्चारण एवं मधुर संगीत (हारमोनियम, ढोलक, तबला, मंजीरा) के साथ सम्पन्न कराती है।

हमारी सुंदरकांड सेवा में सम्मिलित

  • संकल्प एवं गणेश-हनुमान पूजन
  • संपूर्ण सुंदरकांड का सामूहिक संगीतमय पाठ
  • हनुमान चालीसा, बजरंग बाण एवं आरती
  • प्रसाद वितरण की व्यवस्था में सहयोग
  • आवश्यक पूजन सामग्री की पूर्व सूची

किन अवसरों पर सुंदरकांड कराएँ

  • गृह प्रवेश एवं नया कार्यालय / दुकान शुभारंभ
  • जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ एवं पारिवारिक उत्सव
  • मंगलवार / शनिवार विशेष सामूहिक सुंदरकांड
  • कॉलोनी, सोसाइटी एवं मंदिर में सामूहिक आयोजन
  • किसी विशेष संकल्प या मनौती पूर्ण होने पर

भिलाई, दुर्ग एवं रायपुर में सुंदरकांड पाठ बुकिंग

सुंदरकांड पाठ की तिथि सुनिश्चित करने के लिए कृपया 5–7 दिन पूर्व संपर्क करें। हम भिलाई, रिसाली, दुर्ग, भिलाई-3 चरोदा, कुम्हारी, पाटन, रायपुर, राजनांदगांव, भाटापारा, बेमेतरा एवं बालोद सहित छत्तीसगढ़ के अनेक क्षेत्रों में सेवा देते हैं।

भिलाई में सुंदरकांड पाठ की बुकिंग कैसे करें?
88390 35188 पर कॉल या WhatsApp करें, या इस वेबसाइट पर बुकिंग फॉर्म भरें। हमारी टीम तिथि एवं व्यवस्था तय करने हेतु संपर्क करेगी।
सुंदरकांड पाठ में कितना समय लगता है?
सामूहिक सुंदरकांड पाठ लगभग 2 से 2.5 घंटे में आरती एवं प्रसाद वितरण सहित सम्पन्न होता है।
क्या मंडली दुर्ग और रायपुर भी आती है?
जी हाँ, हम भिलाई, दुर्ग, रायपुर, राजनांदगांव, भाटापारा, बेमेतरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक जिलों में सेवा देते हैं।
पाठ के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?
हनुमान जी का चित्र/मूर्ति, दीपक, धूप, फूल, प्रसाद एवं आसन। पूरी सूची बुकिंग के समय दी जाती है।

तुरंत बुकिंग

सुंदरकांड पाठ हेतु आज ही अपनी तिथि सुरक्षित करें।

जानकारी केवल आयोजन संबंधी संपर्क हेतु।

“जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर”

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